मानसून की फुहारों से निखरी विश्व धरोहर फूलों की घाटी में पर्यटकों की बहार, सीजन में पहुंचे 18856 सैलानी

  • मानसून की फुहारों से निखरा विश्व धरोहर स्थल, ब्रह्मकमल-नीला पोस्त समेत 500 से अधिक प्रजातियों के फूलों से सजी घाटी; पिछले वर्ष की तुलना में करीब तीन हजार अधिक पर्यटक

चमोली। मानसून की फुहारों के बीच विश्व धरोहर स्थल फूलों की घाटी इन दिनों अपने पूरे यौवन पर है। हरी-भरी पहाड़ियों, कल-कल बहते प्राकृतिक झरनों और रंग-बिरंगे फूलों की चादर ने घाटी की खूबसूरती में चार चांद लगा दिए हैं। प्रकृति के इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटकों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। इस वर्ष अब तक 18,856 पर्यटक फूलों की घाटी का दीदार कर चुके हैं, जिनमें 122 विदेशी सैलानी भी शामिल हैं।

पिछले वर्ष से करीब तीन हजार अधिक पर्यटक पहुंचे

वन क्षेत्र अधिकारी चेतना कांडपाल के अनुसार, अगस्त का पहला और दूसरा पखवाड़ा फूलों की घाटी में फूलों के खिलने का चरम समय माना जाता है। इस बार मौसम भी लगातार अनुकूल बना हुआ है। इसके चलते पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 की इसी अवधि में घाटी में 15,924 पर्यटक पहुंचे थे, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 18,856 हो गई है। इस तरह पिछले वर्ष की तुलना में करीब तीन हजार अधिक पर्यटकों ने घाटी का रुख किया है।

बारिश के बावजूद सुचारू रही आवाजाही

इस पर्यटन सीजन में सबसे बड़ी राहत यह रही कि लगातार बारिश के बावजूद भूस्खलन और खराब मौसम के कारण फूलों की घाटी को बार-बार बंद नहीं करना पड़ा। इससे पर्यटकों की आवाजाही सुचारू बनी रही। लगातार पर्यटकों के पहुंचने से स्थानीय कारोबारियों और पर्यटन से जुड़े लोगों को भी इसका लाभ मिला है।

ब्रह्मकमल और नीला पोस्त बने आकर्षण का केंद्र

फिलहाल फूलों की घाटी में ब्रह्मकमल, नीला पोस्त, एनीमोन समेत दुर्लभ प्रजातियों के फूल खिले हुए हैं। हरी-भरी पहाड़ियों के बीच रंग-बिरंगे फूलों से सजी घाटी का मनमोहक दृश्य पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। अगस्त में फूलों के चरम खिलने के कारण आने वाले दिनों में पर्यटकों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।

जैव विविधता को नुकसान न पहुंचाने की अपील

वन विभाग ने घाटी में पहुंचने वाले पर्यटकों से इसकी प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता को संरक्षित रखने की अपील की है। पर्यटकों से निर्धारित ट्रैक पर ही आवाजाही करने तथा दुर्लभ वनस्पतियों एवं फूलों को किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंचाने का आग्रह किया गया है। विभाग का कहना है कि फूलों की घाटी केवल पर्यटन स्थल ही नहीं, बल्कि हिमालय की समृद्ध जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र भी है।

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