निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आशुतोष सायना ने दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय का किया सघन निरीक्षण, व्यवस्थाओं में लापरवाही पर दिए कड़े निर्देश

देहरादून : चिकित्सा शिक्षा निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) आशुतोष सायना के नेतृत्व में राजकीय दून मेडिकल कॉलेज संबद्ध दून चिकित्सालय का ब्लॉकवार सघन निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्थाओं, मरीजों की सुविधा, स्वच्छता, स्टाफ की कार्यप्रणाली, आपातकालीन सेवाओं, वार्ड प्रबंधन तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय का बारीकी से जायजा लिया गया।

निरीक्षण के पश्चात चिकित्सालय के पंचम तल स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में सुपरस्पेशलिटी, क्लिनिकल, पैराक्लिनिकल, नर्सिंग, फार्मेसी, रेडियोडायग्नोसिस एवं ब्लड बैंक सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों, प्रोफेसरों एवं एसोसिएट प्रोफेसरों के साथ उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।

बैठक में कॉलेज की डीन एवं प्राचार्या प्रोफेसर डॉ. गीता जैन ने अस्पताल एवं कॉलेज स्तर पर मरीजों के हित तथा विद्यार्थियों के विकास के लिए किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों की जानकारी दी। इनमें न्यू सीएसएसडी ब्लॉक, नए 500 बेड अस्पताल ब्लॉक, इमरजेंसी ओटी केयर सर्विसेज, ओपीडी एवं आईपीडी सेवाओं का उन्नयन, स्किल सेंटर तथा नए सुपरस्पेशलिटी कार्यक्रम प्रमुख हैं।

चिकित्सकों एवं स्टाफ की सुरक्षा के लिए चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर डॉ. रवींद्र सिंह बिष्ट के माध्यम से अतिरिक्त सुरक्षा बल बढ़ाने तथा नए सीसीटीवी कैमरों की स्थापना सहित किए जा रहे कार्यों की जानकारी भी दी गई।

मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

निदेशक चिकित्सा शिक्षा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अस्पताल में आने वाला प्रत्येक मरीज संस्थान की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मरीजों को किसी भी स्तर पर अनावश्यक परेशानी, देरी अथवा लापरवाही का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने अधिकारियों एवं विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए कि अस्पताल की व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की शिथिलता अथवा अनुशासनहीनता स्वीकार नहीं की जाएगी।

उन्होंने वार्ड बॉय, सफाई कर्मचारियों एवं सहायक कर्मचारियों के लिए सख्त रोटेशन नीति लागू करने तथा निर्धारित कार्यक्षेत्र में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से इधर-उधर घूमने की अनुमति नहीं होगी तथा मरीजों को शिफ्ट करने अथवा जांच के लिए ले जाने जैसे अधिकृत कार्यों के दौरान ही कार्यक्षेत्र से बाहर जाने की व्यवस्था होगी।

मरीजों की देखभाल में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

निदेशक ने नर्सिंग स्टाफ एवं वार्ड कर्मचारियों को मरीजों की देखभाल के प्रति पूर्ण रूप से जवाबदेह रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीज की देखभाल में लापरवाही को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और जिम्मेदारी तय की जाएगी।

रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी एवं क्लिनिकल विभागों में समन्वय

निदेशक ने रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी एवं क्लिनिकल विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड एवं अन्य जांचों की रिपोर्टिंग में उपलब्ध क्लिनिकल जानकारी तथा संबंधित जांचों का समुचित समन्वय रखा जाए, ताकि मरीज को अधिक सटीक एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा मिल सके। रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने वाले चिकित्सक को रिपोर्ट की गुणवत्ता एवं नैदानिक जिम्मेदारी के प्रति पूरी तरह जवाबदेह रहने के निर्देश दिए गए।

डिजिटल रिपोर्टिंग एवं त्वरित संचार

मरीजों को रिपोर्ट के लिए अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े, इसके लिए अधिकतम संभव सीमा तक डिजिटल रिपोर्टिंग एवं अधिकृत डिजिटल संचार माध्यमों का उपयोग करने के निर्देश दिए गए। निदेशक ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में रिपोर्ट एवं चिकित्सकीय जानकारी के संचार में अनावश्यक देरी स्वीकार्य नहीं है।

जूनियर डॉक्टरों एवं इंटर्न के प्रशिक्षण पर जोर

पीजी छात्रों, जूनियर डॉक्टरों एवं इंटर्न को वरिष्ठ फैकल्टी के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में कार्य कराने के निर्देश दिए गए। आईसीयू, ओटी एवं वार्डों में ड्रेस कोड, स्क्रब कल्चर, संक्रमण नियंत्रण एवं निर्धारित SOP का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया।

इमरजेंसी सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं

निदेशक ने आपातकालीन विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि गंभीर मरीजों के उपचार में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। इमरजेंसी में वरिष्ठ एवं अनुभवी चिकित्सकों की उपलब्धता तथा स्पष्ट SOP के अनुसार त्वरित निर्णय लेने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि इमरजेंसी सेवा अस्पताल की सबसे संवेदनशील इकाइयों में से एक है और यहां किसी भी प्रकार की लापरवाही का सीधा प्रभाव मरीज के जीवन पर पड़ सकता है। इसलिए प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

अस्पताल प्रशासन एवं सुरक्षा व्यवस्था होगी और मजबूत

निदेशक ने अस्पताल प्रबंधन को प्रशासनिक अनुशासन, मरीजों की सुरक्षा और चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करने तथा अस्पताल परिसर की निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए सीसीटीवी एवं सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।

बैठक में उप चिकित्सा अधीक्षक प्रशासन डॉ. विनम्र मित्तल, उप चिकित्सा अधीक्षक (ओटी, आईसीयू एवं इमरजेंसी) डॉ. शोभा वी., उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमित कुमार सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, संकाय सदस्य, नर्सिंग, पैरामेडिकल एवं फार्मेसी के प्रभारी उपस्थित रहे।

बैठक में मुख्य जनसंपर्क अधिकारी महेंद्र भंडारी, पेशेंट कोऑर्डिनेटर संदीप राणा, जनसंपर्क अधिकारी विनोद नैनवाल एवं दिनेश रावत भी उपस्थित रहे।

अंत में डीन एवं प्राचार्या प्रोफेसर डॉ. गीता जैन ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य प्रत्येक मरीज को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित एवं सुलभ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। अस्पताल की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए सभी विभागों के सामूहिक प्रयास एवं प्रशासनिक अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

निदेशक चिकित्सा शिक्षा प्रोफेसर (डॉ.) आशुतोष सायना के निरीक्षण एवं निर्देशों का स्पष्ट संदेश रहा कि मरीजों की सुरक्षा, चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता, अनुशासन और जवाबदेही से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी की जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

 

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